~अध्यक्ष जी के कलम से~
अध्यक्ष जी
श्री हनुमान प्रसाद दुबे
(एड्वोकेट)
वर्तमान परिवेश आधुनिकता बोध से भरे जीवन में शिक्षा का कार्य मानव व्यवहार में संतुलित, परिमार्जित एवं विकासोन्मुख परिवर्तन करना है। जिसमें परिमार्जन का तात्पर्य मानवीय क्रियाओं में यथानुरूप समाजोचित शोधन से है एवं परिवर्तन किसी कार्य को करने की क्रिया पद्धति का मार्गान्तरीकरण है। अत: शिक्षा का एक मात्र स्वयंसिद्ध लक्ष्य गतिशील जीवन में संस्कार सम्पन्न सभ्य परिवर्तन है। वर्तमान मानव जीवन ग्रामीण एवं नगरीय इकाइयों में विभक्त है जिसमें नगरीय जीवन तो सुविधाओं के आधिक्य के कारण शिक्षित और सभ्य होता गया जबकी ग्रामीण जीवन की परिस्थितियाँ सर्वथा अभावग्रस्त हि रहीं। इन्हीं परिस्थितियों से आकुल होकर शैक्षिक दृष्टि से उसर, गोरखपुर शहर से दक्षिण निरा पगडंडियों वाले सरयू के दियारे बेलघाट के जैती गांव में पं० हरिसहाय डिग्री कॉलेज की स्थापना की गयी परन्तु प्रशिक्षण और परिमार्जन की कमी अभी भी जस की तस थी। इस कमी को देखते हुए प्रशिक्षुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए पं० हरिसहाय शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान को संचालित किया गया जिससे बेलघाट और आस-पास के ग्रामीण बच्चों के साथ-साथ शहरी बच्चे भी लाभान्वित हो रहें हैं।


